' भय बिन होय न प्रीति । '
भय भी बहुत प्रकार के होते हैं ।
आर्थिक दंड , शारीरिक ( बीमारी या बुढ़ापा ) दंड इत्यादि ।
वैसे यह सब हारे इंसान का यह भ्रम है ।
दंड प्रतिशोध और आतंक का जन्मदाता है ।
प्रीति तो वह बीज है जो धीरे धीरे बढ़ती है फलती फूलती है और अविश्वास के मौसम में कुम्हला जाती है ।
धीरे धीरे रे मना धीरे धीरे सब कुछ होय ।
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय ।।
कुछ लोगों को ज्ञान देर में प्राप्त होता है ।
Health Insurance is an typical umbrella
And you buy it every year
To keep yourself safe in unfavourable condition
But you need someone else
To open it for you .... to keep yourself safe .