हमारे गाँव में सती मंदिर जाते थे हमारे घर के लोग । बच्चों का मुंडन संस्कार वहीं होता था । स्कूल के दिन में सती की कहानी सुन कर अच्छा लगता था । सती के पिता पर क्रोध आता था ।
ज्यों ज्यों पुस्तकें पढ़ती गई सती प्रथा का ज्ञान हुआ । बाल विधवाओं के बारे में ज्ञान हुआ महिलाओं की समाज में दुखद स्थिति से परिचित हुई । और आज महसूस हुआ कि शादी के बाद एक प्रकार से गुलाम हो जाती हैं लड़कियां ।
कितना भी पढ़ ले लड़कियां आम लड़कियां बहुत दुख भोगती हैं ।
कितना भी लिखिए लड़कियों की आजादी के बारे में पर चेतना नहीं आती लड़कियों में । उन्हें लगता है शादी आर्थिक चिंता से मुक्त करती है और उसे सुरक्षा देती है । ऐसी लड़कियां सती की मंदिर में मनौतियां मानती हैं अपने बेटे के लिए । यही बेटा उच्च पदस्थ हो कर माँ से दूर हो जाता है ।
आखिर क्यों महिमामंडन हो रहा है सती का । अवचेतन मन में ह्ारे सती जीवित है । काश सती हुई महिला के कष्ट से हम परिचित हो पाते ।
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