हमारे स्कूल में टीचर ट्यूशन नहीं पढ़ाते। अलाउड ही नहीं है । यह बोल कर प्रिंसिपल अपने विद्यार्थियों की जिम्मेवारी से मुक्त हो जाते हैं ।
विद्यार्थी सभी विषयों में पास नंबर लाता है । चिंता की कोई बात नहीं । बच्चा कम नंबर लाता है तो अभिभावक स्कूल से बुलावा आता है । विषय टीचर अभिभावक को उसके बच्चे की समस्या से अवगत कराते हैं बस । वैसे स्कूल में साइकोलॉजिस्ट है बच्चों की समस्या सुलझाने के लिये।
बच्चा क्लास में शैतानी करता है । पढ़ाई में उसका मन नहीं लगता है। घर में माता पिता नौकरी करते हैं । कुक है । झाड़ू बर्तन के लिये कामवाली है । ट्यूशन टीचर लगा है । विषयों में कम नंबर आता है तो ट्यूशन टीचर बदल दिया जाता है । बच्चा मिडिल स्कूल में है । काश बच्चे को इतनी समझ होती कि बच्चे अपनी माता पिता की समस्याओं को समझ पाते । माँ सबसे ज्यादा परेशान होती है ।
इससे अच्छा तो वह स्कूल है जहां टीचर को ट्यूशन अलाउड है । कम से कम बच्चे के कम नंबर लाने के लिये वे जवाबदेह होते । आप आखिर कैसा पढ़ा रहे हैं स्कूल में और ट्यूशन में कि बच्चा पास ही नहीं होता ।
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